श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 6: दैवकी अपेक्षा पुरुषार्थकी श्रेष्ठताका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  13.6.22 
कृत: पुरुषकारस्तु दैवमेवानुवर्तते।
न दैवमकृते किंचित् कस्यचिद् दातुमर्हति॥ २२॥
 
 
अनुवाद
केवल किये गये प्रयास ही भाग्य का अनुसरण करते हैं; लेकिन यदि प्रयास नहीं किये गये तो भाग्य किसी को कुछ नहीं दे सकता। 22.
 
Only the efforts made follow destiny; but if efforts are not made then destiny cannot give anything to anyone. 22.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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