|
| |
| |
श्लोक 13.6.22  |
कृत: पुरुषकारस्तु दैवमेवानुवर्तते।
न दैवमकृते किंचित् कस्यचिद् दातुमर्हति॥ २२॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| केवल किये गये प्रयास ही भाग्य का अनुसरण करते हैं; लेकिन यदि प्रयास नहीं किये गये तो भाग्य किसी को कुछ नहीं दे सकता। 22. |
| |
| Only the efforts made follow destiny; but if efforts are not made then destiny cannot give anything to anyone. 22. |
| ✨ ai-generated |
| |
|