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mahabharat 13.6.19: यदि हमें अपने कर्मों का फल न मिले, तो हमारे सारे कर्म व्यर्थ हो जाते हैं और सब लोग केवल भाग्य को देखते हुए कर्म करने से उदासीन हो जाते हैं ॥19॥   |   mahabharat अध्याय 13.6: दैवकी अपेक्षा पुरुषार्थकी श्रेष्ठताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 6: दैवकी अपेक्षा पुरुषार्थकी श्रेष्ठताका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  13.6.19 
स्वं चेत् कर्मफलं न स्यात् सर्वमेवाफलं भवेत्।
लोको दैवं समालक्ष्य उदासीनो भवेन्ननु॥ १९॥
 
 
अनुवाद
यदि हमें अपने कर्मों का फल न मिले, तो हमारे सारे कर्म व्यर्थ हो जाते हैं और सब लोग केवल भाग्य को देखते हुए कर्म करने से उदासीन हो जाते हैं ॥19॥
 
If we do not receive the fruits of our actions, then all our actions become futile and everyone, looking only at fate, becomes indifferent to performing actions. ॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)