Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.6.10: अच्छे कर्म करने से सुख मिलता है और बुरे कर्म करने से दुःख। स्वयं किए हुए कर्म सर्वत्र फल देते हैं। न किए हुए कर्मों का फल कहीं भी नहीं मिलता।॥10॥ | mahabharat अध्याय 13.6: दैवकी अपेक्षा पुरुषार्थकी श्रेष्ठताका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अच्छे कर्म करने से सुख मिलता है और बुरे कर्म करने से दुःख। स्वयं किए हुए कर्म सर्वत्र फल देते हैं। न किए हुए कर्मों का फल कहीं भी नहीं मिलता।॥10॥
By doing good deeds, one gets happiness and by doing bad deeds, one gets sorrow. The deeds done by oneself bear fruit everywhere. The fruits of deeds not done can never be experienced anywhere.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥