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mahabharat 13.59.7: प्रजानाथ! मैं तुम्हें एक अद्भुत रहस्य बताता हूँ। मृत्यु के बाद मनुष्य किस कर्म के आधार पर किस गति को प्राप्त होता है - इस विषय को सुनो।   |   mahabharat अध्याय 13.59: विविध प्रकारके तप और दानोंका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 59: विविध प्रकारके तप और दानोंका फल  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.59.7 
रहस्यमद्भुतं चैव शृणु वक्ष्यामि यत् त्वयि।
या गति: प्राप्यते येन प्रेत्यभावे विशाम्पते॥ ७॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! मैं तुम्हें एक अद्भुत रहस्य बताता हूँ। मृत्यु के बाद मनुष्य किस कर्म के आधार पर किस गति को प्राप्त होता है - इस विषय को सुनो।
 
Prajanaath! I am going to tell you a wonderful secret. After death, a man gets what state based on which deeds - listen to this topic.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)