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mahabharat 13.59.41: जो पुरुष युद्धभूमि में वीरों की शय्या पर लेटा है, वह ब्रह्मा के समान हो जाता है। ब्रह्मा से बढ़कर कोई भी नहीं है - ऐसा महर्षियों का कथन है।॥41॥   |   mahabharat अध्याय 13.59: विविध प्रकारके तप और दानोंका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 59: विविध प्रकारके तप और दानोंका फल  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  13.59.41 
पितामहस्यानवरो वीरशायी भवेन्नर:।
नाधिकं विद्यते यस्मादित्याहु: परमर्षय:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
जो पुरुष युद्धभूमि में वीरों की शय्या पर लेटा है, वह ब्रह्मा के समान हो जाता है। ब्रह्मा से बढ़कर कोई भी नहीं है - ऐसा महर्षियों का कथन है।॥41॥
 
A man who lies on the bed of heroes on the battlefield becomes equal to Lord Brahma. There is nothing greater than Lord Brahma - this is the statement of great sages.'॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)