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mahabharat 13.59.37: ‘जो मनुष्य अन्न, जल और रस देता है, उसे उसकी इच्छानुसार सब प्रकार के रस प्राप्त होते हैं और जो रहने के लिए घर और पहनने के लिए वस्त्र देता है, उसे भी ये सब वस्तुएँ प्राप्त होती हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है॥37॥   |   mahabharat अध्याय 13.59: विविध प्रकारके तप और दानोंका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 59: विविध प्रकारके तप और दानोंका फल  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  13.59.37 
भक्ष्यान्नपानीयरसप्रदाता
सर्वान् समाप्नोति रसान् प्रकामम्।
प्रतिश्रयाच्छादनसम्प्रदाता
प्राप्नोति तान्येव न संशयोऽत्र॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
‘जो मनुष्य अन्न, जल और रस देता है, उसे उसकी इच्छानुसार सब प्रकार के रस प्राप्त होते हैं और जो रहने के लिए घर और पहनने के लिए वस्त्र देता है, उसे भी ये सब वस्तुएँ प्राप्त होती हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है॥37॥
 
‘The person who gives food, water and juice receives all kinds of juices as per his desire and the one who gives a house to live in and clothes to wear, he also gets these things. There is no doubt in this.॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)