Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.59.2: हे भरतनादन के पुत्र! पितामह! यद्यपि मैंने इस पृथ्वी को जीत लिया है और सैकड़ों देशों के राज्यों पर अधिकार प्राप्त कर लिया है, तथापि मुझे इस बात का बड़ा दुःख है कि इसके लिए मुझे लाखों लोगों का वध करना पड़ा। | mahabharat अध्याय 13.59: विविध प्रकारके तप और दानोंका फल । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे भरतनादन के पुत्र! पितामह! यद्यपि मैंने इस पृथ्वी को जीत लिया है और सैकड़ों देशों के राज्यों पर अधिकार प्राप्त कर लिया है, तथापि मुझे इस बात का बड़ा दुःख है कि इसके लिए मुझे लाखों लोगों का वध करना पड़ा।
O son of Bharatanadan! Grandfather! Although I have conquered this earth and gained control over the kingdoms of hundreds of countries, yet I am very saddened by the fact that I had to kill millions of people for this.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥