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mahabharat 13.59.11: अहिंसा का फल सौन्दर्य है और दीक्षा का फल उत्तम कुल में जन्म है। जो फल-सब्जी खाकर जीवनयापन करते हैं, वे राज्य प्राप्त करते हैं और जो पत्ते चबाकर तपस्या करते हैं, वे स्वर्ग प्राप्त करते हैं।'   |   mahabharat अध्याय 13.59: विविध प्रकारके तप और दानोंका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.59.11 
अहिंसाया: फलं रूपं दीक्षाया जन्म वै कुले।
फलमूलाशिनां राज्यं स्वर्ग: पर्णाशिनां भवेत्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
अहिंसा का फल सौन्दर्य है और दीक्षा का फल उत्तम कुल में जन्म है। जो फल-सब्जी खाकर जीवनयापन करते हैं, वे राज्य प्राप्त करते हैं और जो पत्ते चबाकर तपस्या करते हैं, वे स्वर्ग प्राप्त करते हैं।'
 
‘The fruit of non-violence is beauty and the fruit of initiation is birth in a good family. Those who live by eating fruits and vegetables attain kingdom and those who do penance by chewing leaves attain heaven.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)