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mahabharat 13.58.7: हे पापरहित राजा! उसी स्त्री का पुत्र भृगुकुलनन्दन धनवान होगा, जिसकी सेवा में सम्पूर्ण धनुर्वेद मूर्ति रूप में उपस्थित रहेगा॥7॥   |   mahabharat अध्याय 13.58: च्यवन ऋषिका भृगुवंशी और कुशिकवंशियोंके सम्बन्धका कारण बताकर तीर्थयात्राके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.58.7 
पुत्रं तस्य महाराज ऋचीकं भृगुनन्दनम्।
साक्षात् कृत्स्नो धनुर्वेद: समुपस्थास्यतेऽनघ॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे पापरहित राजा! उसी स्त्री का पुत्र भृगुकुलनन्दन धनवान होगा, जिसकी सेवा में सम्पूर्ण धनुर्वेद मूर्ति रूप में उपस्थित रहेगा॥7॥
 
Sinless King! The son of the same woman, Bhrigukulnandan, will be rich, in whose service the entire Dhanurveda will be present in the form of an idol. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)