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mahabharat 13.58.11: महातपस्वी ऋचीक आपकी पौत्री और गाधि की कन्या को प्राप्त करके क्षत्रियधर्मी ब्राह्मण वर्ण का पुत्र उत्पन्न करेंगे (अपनी पत्नी के अनुरोध करने पर ऋचीक अपने पुत्र में से क्षत्रियत्व हटाकर उसे अपने होने वाले पौत्र में डाल देंगे)॥ 11॥   |   mahabharat अध्याय 13.58: च्यवन ऋषिका भृगुवंशी और कुशिकवंशियोंके सम्बन्धका कारण बताकर तीर्थयात्राके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.58.11 
गाधेर्दुहितरं प्राप्य पौत्रीं तव महातपा:।
ब्राह्मणं क्षत्रधर्माणं पुत्रमुत्पादयिष्यति॥ ११॥
 
 
अनुवाद
महातपस्वी ऋचीक आपकी पौत्री और गाधि की कन्या को प्राप्त करके क्षत्रियधर्मी ब्राह्मण वर्ण का पुत्र उत्पन्न करेंगे (अपनी पत्नी के अनुरोध करने पर ऋचीक अपने पुत्र में से क्षत्रियत्व हटाकर उसे अपने होने वाले पौत्र में डाल देंगे)॥ 11॥
 
Having got your granddaughter and Gadhi's daughter, the great ascetic Richik will produce a son of the Brahmin caste having Kshatriya dharma (on the request of his wife, Richik will remove Kshatriyahood from his son and will instill it in his future grandson).॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)