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mahabharat 13.57.29: पृथ्वीनाथ! आप सम्राट और देवताओं के राजा के पद की उपेक्षा करके ब्राह्मणत्व प्राप्त करना चाहते हैं और साथ ही तपस्या करने की भी इच्छा रखते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.57: च्यवनका कुशिकके पूछनेपर उनके घरमें अपने निवासका कारण बताना और उन्हें वरदान देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.57.29 
ब्राह्मण्यं काङ्क्षसे हि त्वं तपश्च पृथिवीपते।
अवमन्य नरेन्द्रत्वं देवेन्द्रत्वं च पार्थिव॥ २९॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वीनाथ! आप सम्राट और देवताओं के राजा के पद की उपेक्षा करके ब्राह्मणत्व प्राप्त करना चाहते हैं और साथ ही तपस्या करने की भी इच्छा रखते हैं।
 
Prithvinath! You disregard the status of the Emperor and the King of Gods and want to attain brahminhood and also desire to perform austerities.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)