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श्लोक  13.57.18 
उत्थाय चास्मि निष्क्रान्तो यदि मां त्वं महीपते।
पृच्छे: क्व यास्यसीत्येवं शपेयं त्वामिति प्रभो॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! हे प्रभु! जब मैं घर से बाहर जाने के लिए उठा, तब यदि आपने मुझसे पूछा होता कि 'कहाँ जा रहे हो', तो मैं आपको शाप दे देता।
 
O king! O Lord! When I got up to go out of the house, if you had asked me 'where are you going', I would have cursed you with that.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)