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mahabharat 13.56.9: हे भरतनन्दन! कहीं जल शीतल था, कहीं गर्म। उन महलों में विचित्र चटाइयाँ और उत्तम शय्याएँ थीं॥9॥   |   mahabharat अध्याय 13.56: महर्षि च्यवनके प्रभावसे राजा कुशिक और उनकी रानीको अनेक आश्चर्यमय दृश्योंका दर्शन एवं च्यवन मुनिका प्रसन्न होकर राजाको वर माँगनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 56: महर्षि च्यवनके प्रभावसे राजा कुशिक और उनकी रानीको अनेक आश्चर्यमय दृश्योंका दर्शन एवं च्यवन मुनिका प्रसन्न होकर राजाको वर माँगनेके लिये कहना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  13.56.9 
शीतलानि च तोयानि क्वचिदुष्णानि भारत।
आसनानि विचित्राणि शयनप्रवराणि च॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे भरतनन्दन! कहीं जल शीतल था, कहीं गर्म। उन महलों में विचित्र चटाइयाँ और उत्तम शय्याएँ थीं॥9॥
 
O Bharatanandan! Somewhere the water was cold and somewhere it was hot. In those palaces, there were strange mats and the finest beds.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)