Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.56.37-38h: हे राजन! अब मुझे विदा दीजिए। मैं जिस मार्ग से आई हूँ, उसी मार्ग से लौट जाऊँगी। हे राजन! मैं आपसे अत्यंत प्रसन्न हूँ; अतः कोई भी वर माँग लीजिए।   |   mahabharat अध्याय 13.56: महर्षि च्यवनके प्रभावसे राजा कुशिक और उनकी रानीको अनेक आश्चर्यमय दृश्योंका दर्शन एवं च्यवन मुनिका प्रसन्न होकर राजाको वर माँगनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 56: महर्षि च्यवनके प्रभावसे राजा कुशिक और उनकी रानीको अनेक आश्चर्यमय दृश्योंका दर्शन एवं च्यवन मुनिका प्रसन्न होकर राजाको वर माँगनेके लिये कहना  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  13.56.37-38h 
अनुजानीहि मां राजन् गमिष्यामि यथागतम्॥ ३७॥
प्रीतोऽस्मि तव राजेन्द्र वरश्च प्रतिगृह्यताम्।
 
 
अनुवाद
हे राजन! अब मुझे विदा दीजिए। मैं जिस मार्ग से आई हूँ, उसी मार्ग से लौट जाऊँगी। हे राजन! मैं आपसे अत्यंत प्रसन्न हूँ; अतः कोई भी वर माँग लीजिए।
 
‘O King! Now give me leave. I will return the same way I came. O King! I am very pleased with you; therefore, ask for any boon.’
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)