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mahabharat 13.56.30: महर्षि च्यवन के अतिरिक्त और कौन ऐसा महान कार्य कर सकता है? इस संसार में मनुष्यों का राजा बनना तो सरल है, परन्तु सच्चा ब्राह्मणत्व अत्यंत दुर्लभ है॥30॥   |   mahabharat अध्याय 13.56: महर्षि च्यवनके प्रभावसे राजा कुशिक और उनकी रानीको अनेक आश्चर्यमय दृश्योंका दर्शन एवं च्यवन मुनिका प्रसन्न होकर राजाको वर माँगनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.56.30 
उत्सहेदिह कृत्वैव कोऽन्यो वै च्यवनादृते।
ब्राह्मण्यं दुर्लभं लोके राज्यं हि सुलभं नरै:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
महर्षि च्यवन के अतिरिक्त और कौन ऐसा महान कार्य कर सकता है? इस संसार में मनुष्यों का राजा बनना तो सरल है, परन्तु सच्चा ब्राह्मणत्व अत्यंत दुर्लभ है॥30॥
 
‘Who else other than Maharshi Chyavana can do such a great work? In this world, it is easy for men to become kings, but true brahminhood is extremely rare.॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)