Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.56.29: वे चाहें तो अपनी तपस्या के बल से अन्य लोकों की रचना कर सकते हैं। इस पृथ्वी पर केवल ब्राह्मण ही शुद्ध वाणी, शुद्ध बुद्धि और शुद्ध कर्म वाले हैं। | mahabharat अध्याय 13.56: महर्षि च्यवनके प्रभावसे राजा कुशिक और उनकी रानीको अनेक आश्चर्यमय दृश्योंका दर्शन एवं च्यवन मुनिका प्रसन्न होकर राजाको वर माँगनेके लिये कहना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे चाहें तो अपनी तपस्या के बल से अन्य लोकों की रचना कर सकते हैं। इस पृथ्वी पर केवल ब्राह्मण ही शुद्ध वाणी, शुद्ध बुद्धि और शुद्ध कर्म वाले हैं।
‘They can create other worlds by the power of their penance if they so desire. On this earth, only Brahmins have pure speech, pure intellect and pure deeds.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥