श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 56: महर्षि च्यवनके प्रभावसे राजा कुशिक और उनकी रानीको अनेक आश्चर्यमय दृश्योंका दर्शन एवं च्यवन मुनिका प्रसन्न होकर राजाको वर माँगनेके लिये कहना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  13.56.28 
तपसा हि सुतप्तेन शक्यो मोक्षस्तपोबलात्।
अहो प्रभावो ब्रह्मर्षेश्च्यवनस्य महात्मन:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई विधिपूर्वक तप करे, तो उसके बल से मोक्ष प्राप्त हो सकता है। इन ब्रह्मर्षि महात्मा च्यवन का प्रभाव अद्भुत है॥28॥
 
‘If one does penance properly, one can attain salvation by its power. The influence of this Brahmarshi Mahatma Chyavan is amazing.॥ 28॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas