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mahabharat 13.56.26: कल्याणि! देखो, भृगुकुलतिलक च्यवन मुनि की कृपा से हमने ऐसी अद्भुत और अत्यंत दुर्लभ वस्तुएँ देखी हैं। भला, तपबल से बढ़कर और कौन-सा बल है?'   |   mahabharat अध्याय 13.56: महर्षि च्यवनके प्रभावसे राजा कुशिक और उनकी रानीको अनेक आश्चर्यमय दृश्योंका दर्शन एवं च्यवन मुनिका प्रसन्न होकर राजाको वर माँगनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.56.26 
पश्य भद्रे यथा भावाश्चित्रा दृष्टा: सुदुर्लभा:।
प्रसादाद् भृगुमुख्यस्य किमन्यत्र तपोबलात्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
कल्याणि! देखो, भृगुकुलतिलक च्यवन मुनि की कृपा से हमने ऐसी अद्भुत और अत्यंत दुर्लभ वस्तुएँ देखी हैं। भला, तपबल से बढ़कर और कौन-सा बल है?'
 
‘Kalyani! Look, we have seen such wonderful and extremely rare things by the grace of Bhrigukultilak Chyavan Muni. Well, what other power is greater than the power of penance?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)