Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.56.24-25: वहाँ पहले की भाँति कुश और बांबी की बहुतायत हो गई। तत्पश्चात, राजा कुशिक और उनकी पत्नी ऋषि के उस महान् अद्भुत प्रभाव को देखकर आश्चर्यचकित हो गए। तत्पश्चात, हर्ष से परिपूर्ण कुशिक ने अपनी पत्नी से कहा -॥24-25॥ | mahabharat अध्याय 13.56: महर्षि च्यवनके प्रभावसे राजा कुशिक और उनकी रानीको अनेक आश्चर्यमय दृश्योंका दर्शन एवं च्यवन मुनिका प्रसन्न होकर राजाको वर माँगनेके लिये कहना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुशवल्मीकभूयिष्ठं बभूव च यथा पुरा।
तत: स राजा कुशिक: सभार्यस्तेन कर्मणा॥ २४॥
विस्मयं परमं प्राप्तस्तद् दृष्ट्वा महदद्भुतम्।
तत: प्रोवाच कुशिको भार्यां हर्षसमन्वित:॥ २५॥
अनुवाद
वहाँ पहले की भाँति कुश और बांबी की बहुतायत हो गई। तत्पश्चात, राजा कुशिक और उनकी पत्नी ऋषि के उस महान् अद्भुत प्रभाव को देखकर आश्चर्यचकित हो गए। तत्पश्चात, हर्ष से परिपूर्ण कुशिक ने अपनी पत्नी से कहा -॥24-25॥
There was abundance of Kush and Bambi as before. After that, King Kushik and his wife were amazed at the great wonderful effect of Rishi's action. After this, Kushik, who was filled with joy, said to his wife -॥24-25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥