Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.56.15: कभी राजा को संगीत की मधुर ध्वनि सुनाई देती, कभी वेदों के अध्ययन की गहरी ध्वनि उसके कानों तक पहुँचती और कभी उसे हंसों की मधुर ध्वनि सुनाई देती।   |   mahabharat अध्याय 13.56: महर्षि च्यवनके प्रभावसे राजा कुशिक और उनकी रानीको अनेक आश्चर्यमय दृश्योंका दर्शन एवं च्यवन मुनिका प्रसन्न होकर राजाको वर माँगनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 56: महर्षि च्यवनके प्रभावसे राजा कुशिक और उनकी रानीको अनेक आश्चर्यमय दृश्योंका दर्शन एवं च्यवन मुनिका प्रसन्न होकर राजाको वर माँगनेके लिये कहना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  13.56.15 
गीतध्वनिं सुमधुरं तथैवाध्यापनध्वनिम्।
हिंसान् सुमधुरांश्चापि तत्र शुश्राव पार्थिव:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
कभी राजा को संगीत की मधुर ध्वनि सुनाई देती, कभी वेदों के अध्ययन की गहरी ध्वनि उसके कानों तक पहुँचती और कभी उसे हंसों की मधुर ध्वनि सुनाई देती।
 
Sometimes the King would hear the sweet sound of music, sometimes the deep sound of study of the Vedas would reach his ears and sometimes he would hear the sweet sound of swans.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)