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mahabharat 13.55.9: यद्यपि राजा और रानी बहुत दुर्बल और भूखे थे, फिर भी 'बहुत अच्छा' कहकर राज दम्पति ने वह बहुमूल्य तेल, जिसे उन्होंने सौ बार पकाकर तैयार किया था, ले लिया और उन्हें परोसने लगे।   |   mahabharat अध्याय 13.55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  13.55.9 
तौ तथेति प्रतिश्रुत्य क्षुधितौ श्रमकर्शितौ।
शतपाकेन तैलेन महार्हेणोपतस्थतु:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि राजा और रानी बहुत दुर्बल और भूखे थे, फिर भी 'बहुत अच्छा' कहकर राज दम्पति ने वह बहुमूल्य तेल, जिसे उन्होंने सौ बार पकाकर तैयार किया था, ले लिया और उन्हें परोसने लगे।
 
Though the King and Queen were very weak and hungry, yet saying, 'Very good', the royal couple took the precious oil which they had prepared after cooking it a hundred times and started serving them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)