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mahabharat 13.55.8: भरत! प्रजानाथ! जब ऋषि उठे, तब उन्होंने राजा-रानी से इस प्रकार कहा - 'तुम सब लोग मेरे शरीर पर तेल मलो; क्योंकि अब मैं स्नान करूँगा।'   |   mahabharat अध्याय 13.55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  13.55.8 
प्रतिबुद्धस्तु स मुनिस्तौ प्रोवाच विशाम्पते।
तैलाभ्यंगो दीयतां मे स्नास्येऽहमिति भारत॥ ८॥
 
 
अनुवाद
भरत! प्रजानाथ! जब ऋषि उठे, तब उन्होंने राजा-रानी से इस प्रकार कहा - 'तुम सब लोग मेरे शरीर पर तेल मलो; क्योंकि अब मैं स्नान करूँगा।'
 
Bharata! Prajanatha! When the sage woke up, he spoke to the king and queen in this manner - 'You all massage my body with oil; because now I will take a bath.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)