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mahabharat 13.55.64: उनके ऐसा कहने पर च्यवन ऋषि ने पुनः राजा कुशिक से कहा - 'भगवन! आप कल अपनी पत्नी सहित पुनः यहाँ आइये।'   |   mahabharat अध्याय 13.55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  13.55.64 
इत्युक्त: प्रत्युवाचैनं कुशिकं च्यवनस्तदा।
आगच्छेथा: सभार्यश्च त्वमिहेति नराधिप॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
उनके ऐसा कहने पर च्यवन ऋषि ने पुनः राजा कुशिक से कहा - 'भगवन! आप कल अपनी पत्नी सहित पुनः यहाँ आइये।'
 
On his saying this, sage Chyavana again said to King Kushika - 'Lord! You come here again tomorrow with your wife.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)