Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.55.61: ‘आपने कोड़ों से जो घाव मेरे शरीर पर लगाए थे, वे घाव तो मुझे और मेरी पत्नी को भी दिए थे, परन्तु अब मैं उन्हें अपने शरीर पर नहीं देख सकता। मैं और मेरी पत्नी पूर्णतः स्वस्थ हैं।॥ 61॥ | mahabharat अध्याय 13.55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रतोदेन व्रणा ये मे सभार्यस्य त्वया कृता:।
तान् न पश्यामि गात्रेषु स्वस्थोऽस्मि सह भार्यया॥ ६१॥
अनुवाद
‘आपने कोड़ों से जो घाव मेरे शरीर पर लगाए थे, वे घाव तो मुझे और मेरी पत्नी को भी दिए थे, परन्तु अब मैं उन्हें अपने शरीर पर नहीं देख सकता। मैं और मेरी पत्नी पूर्णतः स्वस्थ हैं।॥ 61॥
‘You had given me and my wife the wounds that you had inflicted on my body by whipping them, but I cannot see them on my body now. I and my wife are completely healthy.॥ 61॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥