Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.55.59-60: मुनि की यह बात सुनकर राजा कुशिक मन ही मन बहुत प्रसन्न हुए और महर्षि से ये अर्थपूर्ण वचन बोले - 'भगवन्! हे महामुनि! आपने हमें पवित्र कर दिया है। हमारे हृदय में अब कोई खेद या क्रोध नहीं है। हम दोनों युवा हो गए हैं और हमारे शरीर सुन्दर तथा बलवान हो गए हैं।' 59-60 | mahabharat अध्याय 13.55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इत्येवमुक्त: कुशिक: प्रहृष्टेनान्तरात्मना।
प्रोवाच मुनिशार्दूलमिदं वचनमर्थवत्॥ ५९॥
न मे मन्युर्महाभाग पूतौ स्वो भगवंस्त्वया।
संवृतौै यौवनस्थौ स्वो वपुष्मन्तौ बलान्वितौ॥ ६०॥
अनुवाद
मुनि की यह बात सुनकर राजा कुशिक मन ही मन बहुत प्रसन्न हुए और महर्षि से ये अर्थपूर्ण वचन बोले - 'भगवन्! हे महामुनि! आपने हमें पवित्र कर दिया है। हमारे हृदय में अब कोई खेद या क्रोध नहीं है। हम दोनों युवा हो गए हैं और हमारे शरीर सुन्दर तथा बलवान हो गए हैं।' 59-60
On hearing the sage say this, King Kushika became very happy in his heart and said these meaningful words to the great sage - 'Lord! O great one! You have purified us. There is no regret or anger in our hearts. We both have become young and our bodies have become beautiful and strong. 59-60.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥