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mahabharat 13.55.51: उस उत्तम रथ से उतरकर उन्होंने पति-पत्नी दोनों को भार ढोने के कार्य से मुक्त कर दिया और उनसे उचित रीति से वार्तालाप किया।   |   mahabharat अध्याय 13.55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  13.55.51 
अवतीर्य रथश्रेष्ठाद् दम्पती तौ मुमोच ह।
विमोच्य चैतौ विधिवत् ततो वाक्यमुवाच ह॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
उस उत्तम रथ से उतरकर उन्होंने पति-पत्नी दोनों को भार ढोने के कार्य से मुक्त कर दिया और उनसे उचित रीति से वार्तालाप किया।
 
Descending from that excellent chariot, he freed both the husband and wife from the task of carrying the load. After freeing them, he conversed with them in a proper manner. 51.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)