Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.55.50: परन्तु इस कार्य में भी राजा कुशिक ने बड़ी प्रसन्नतापूर्वक ऋषि की आज्ञा का पालन किया। इससे महर्षि भगवान च्यवन बहुत प्रसन्न हुए।   |   mahabharat अध्याय 13.55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  13.55.50 
तत्रापि राजा प्रीतात्मा यथादिष्टमथाकरोत्।
ततोऽस्य भगवान‍् प्रीतो बभूव मुनिसत्तम:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
परन्तु इस कार्य में भी राजा कुशिक ने बड़ी प्रसन्नतापूर्वक ऋषि की आज्ञा का पालन किया। इससे महर्षि भगवान च्यवन बहुत प्रसन्न हुए।
 
But even in this task, King Kushik very happily obeyed the sage's orders. This pleased the great sage Lord Chyavana very much.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)