Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.55.5: उस महामुनि को देखकर वे दोनों अत्यन्त आश्चर्यचकित हो गए। उस अद्भुत घटना से वे विस्मित हो गए। मुनि को देखकर उनकी सारी थकान दूर हो गई। ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 13.55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  13.55.5 
विस्मितौ तमृषिं दृष्ट्वा तदाश्चर्यं विचिन्त्य च।
दर्शनात् तस्य तु तदा विश्रान्तौ सम्बभूवतु:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उस महामुनि को देखकर वे दोनों अत्यन्त आश्चर्यचकित हो गए। उस अद्भुत घटना से वे विस्मित हो गए। मुनि को देखकर उनकी सारी थकान दूर हो गई। ॥5॥
 
Seeing that great sage, both of them were very surprised. They were amazed at that astonishing event. Seeing the sage, all their tiredness vanished. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)