श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  13.55.47 
अहो भगवतो वीर्यं महर्षेर्भावितात्मन:।
राज्ञश्चापि सभार्यस्य धैर्यं पश्यत यादृशम्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
शुद्ध हृदय वाले इन महर्षि भगवान च्यवन की तपशक्ति अद्भुत है। तथा राजा-रानी का धैर्य भी कितना विलक्षण है। इसे अपनी आँखों से देखो।' 47.
 
‘The power of penance of this Maharishi Bhagwan Chyavana, who has a pure heart, is amazing. And the patience of the king and queen is also so unique. See it with your own eyes. 47.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)