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mahabharat 13.55.4: जब राजा ने शून्य मन से घर में प्रवेश किया तो देखा कि भृगुनन्दन महर्षि च्यवन पुनः उसी शय्या पर सो रहे हैं॥4॥   |   mahabharat अध्याय 13.55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.55.4 
अथ शून्येन मनसा प्रविश्य स्वगृहं नृप:।
ददर्श शयने तस्मिन् शयानं भृगुनन्दनम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
जब राजा ने शून्य मन से घर में प्रवेश किया तो देखा कि भृगुनन्दन महर्षि च्यवन पुनः उसी शय्या पर सो रहे हैं॥4॥
 
When the king entered the house with an empty mind, he saw Bhrigunandan Maharishi Chyavan again sleeping on the same bed. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)