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mahabharat 13.55.24: राजा और उसकी पत्नी सारी रात चुपचाप खड़े रहे, परन्तु उसके मन में कोई क्रोध नहीं आया।   |   mahabharat अध्याय 13.55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  13.55.24 
तथैव च स राजर्षिस्तस्थौ तां रजनीं तदा।
सभार्यो वाग्यत: श्रीमान् न च कोपं समाविशत्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
राजा और उसकी पत्नी सारी रात चुपचाप खड़े रहे, परन्तु उसके मन में कोई क्रोध नहीं आया।
 
The noble king and his wife stood there quietly like that throughout the night, but he did not feel any anger in his heart. 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)