श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 55: च्यवन मुनिके द्वारा राजा-रानीके धैर्यकी परीक्षा और उनकी सेवासे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.55.1 
युधिष्ठिर उवाच
तस्मिन्नन्तर्हिते विप्रे राजा किमकरोत् तदा।
भार्या चास्य महाभागा तन्मे ब्रूहि पितामह॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा- पितामह! च्यवन ऋषि के अदृश्य हो जाने पर राजा कुशिक और उनकी परम सौभाग्यशाली पत्नी ने क्या किया? कृपया मुझे यह बताइए।
 
Yudhishthira asked- Grandfather! What did King Kushik and his extremely fortunate wife do after the disappearance of sage Chyavan? Please tell me this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)