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mahabharat 13.53.9: च्यवन ने कहा, "हे राजन! मुझे एक लाख रुपये की कीमत तक सीमित न रखें। मुझे उचित मूल्य दें। इस विषय पर अपने मंत्रियों से चर्चा करें।"   |   mahabharat अध्याय 13.53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  13.53.9 
च्यवन उवाच
नाहं शतसहस्रेण निमेय: पार्थिवर्षभ।
दीयतां सदृशं मूल्यममात्यै: सह चिन्तय॥ ९॥
 
 
अनुवाद
च्यवन ने कहा, "हे राजन! मुझे एक लाख रुपये की कीमत तक सीमित न रखें। मुझे उचित मूल्य दें। इस विषय पर अपने मंत्रियों से चर्चा करें।"
 
Chyavana said, "O King! Do not limit me to the price of one lakh rupees. Pay me a fair price. Discuss this matter with your ministers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)