Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.53.38: च्यवन ने कहा: हे निषादों! दरिद्र और दुःखी मनुष्य, ऋषि या विषधर सर्प की क्रोध भरी दृष्टि मनुष्य को उसी प्रकार भस्म कर देती है, जैसे प्रज्वलित अग्नि सूखी घास के ढेर को जला देती है। | mahabharat अध्याय 13.53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्गति । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
च्यवन ने कहा: हे निषादों! दरिद्र और दुःखी मनुष्य, ऋषि या विषधर सर्प की क्रोध भरी दृष्टि मनुष्य को उसी प्रकार भस्म कर देती है, जैसे प्रज्वलित अग्नि सूखी घास के ढेर को जला देती है।
Chyavana said: O Nishads! The furious glance of a poor and suffering person, of a sage or of a poisonous serpent burns a man to ashes completely, just like a blazing fire burns a heap of dry grass and hay.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥