Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.53.34: हे भरतश्रेष्ठ! मैंने गायों की महानता का वर्णन किया है। यहाँ तो केवल उनके गुणों का वर्णन किया गया है। कोई भी गाय के सम्पूर्ण गुणों का वर्णन नहीं कर सकता। | mahabharat अध्याय 13.53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्गति । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इत्येतद् गोषु मे प्रोक्तं माहात्म्यं भरतर्षभ।
गुणैकदेशवचनं शक्यं पारायणं न तु॥ ३४॥
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! मैंने गायों की महानता का वर्णन किया है। यहाँ तो केवल उनके गुणों का वर्णन किया गया है। कोई भी गाय के सम्पूर्ण गुणों का वर्णन नहीं कर सकता।
O best of the Bharatas! I have described the greatness of cows. Here, their qualities have only been shown. No one can describe the complete qualities of cows.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥