vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्गति
»
श्लोक 31
श्लोक
13.53.31
तेजसा वपुषा चैव गावो वह्निसमा भुवि।
गावो हि सुमहत् तेज: प्राणिनां च सुखप्रदा:॥ ३१॥
अनुवाद
इस पृथ्वी पर गौएँ अग्नि के समान शरीर और तेज से युक्त हैं। वे तेज की महान् स्रोत हैं और समस्त प्राणियों को सुख प्रदान करती हैं ॥31॥
On this earth, cows are like fire in their body and radiance. They are a great source of brilliance and give happiness to all creatures. ॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×