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mahabharat 13.53.29: स्वाहा और वषट्कार तो गौओं में सदैव विद्यमान रहते हैं। गौएँ यज्ञ का संचालन करने वाली और उसका मुख हैं ॥29॥   |   mahabharat अध्याय 13.53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  13.53.29 
स्वाहाकारवषट्कारौ गोषु नित्यं प्रतिष्ठितौ।
गावो यज्ञस्य नेत्र्यो वै तथा यज्ञस्य ता मुखम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
स्वाहा और वषट्कार तो गौओं में सदैव विद्यमान रहते हैं। गौएँ यज्ञ का संचालन करने वाली और उसका मुख हैं ॥29॥
 
Swaha and Vashatkaar are always present in cows. Cows are the ones who conduct the yajna and are its mouth. ॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)