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mahabharat 13.53.28: गायें सदैव लक्ष्मी की स्रोत हैं। उनमें पाप का लेशमात्र भी नहीं है। गायें सदैव मनुष्यों को अन्न और देवताओं को बलि प्रदान करने वाली हैं। 28.   |   mahabharat अध्याय 13.53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  13.53.28 
गावो लक्ष्म्या: सदा मूलं गोषु पाप्मा नविद्यते।
अन्नमेव सदा गावो देवानां परमं हवि:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
गायें सदैव लक्ष्मी की स्रोत हैं। उनमें पाप का लेशमात्र भी नहीं है। गायें सदैव मनुष्यों को अन्न और देवताओं को बलि प्रदान करने वाली हैं। 28.
 
Cows are always the source of Lakshmi. There is not even a trace of sin in them. Cows are the ones who always provide food to humans and sacrifices to the gods. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)