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mahabharat 13.53.23: हे मनुष्यों के स्वामी! मुनि के ये वचन सुनकर राजा नहुष अपने मन्त्रियों और पुरोहितों सहित अत्यन्त प्रसन्न हुए।   |   mahabharat अध्याय 13.53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  13.53.23 
नहुषस्तु तत: श्रुत्वा महर्षेर्वचनं नृप।
हर्षेण महता युक्त: सहामात्यपुरोहित:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! मुनि के ये वचन सुनकर राजा नहुष अपने मन्त्रियों और पुरोहितों सहित अत्यन्त प्रसन्न हुए।
 
Lord of men! On hearing these words of the sage, King Nahush, along with his ministers and priests, became very happy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)