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mahabharat 13.53.21: भीष्म कहते हैं - राजन ! नहुष के वचन सुनकर गौ के गर्भ से उत्पन्न हुए महाबली ऋषि ने राजा और उनके समस्त मन्त्रियों को प्रसन्न करते हुए कहा -॥21॥   |   mahabharat अध्याय 13.53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  13.53.21 
भीष्म उवाच
नहुषस्य वच: श्रुत्वा गविजात: प्रतापवान्।
उवाच हर्षयन् सर्वानमात्यान् पार्थिवं च तम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - राजन ! नहुष के वचन सुनकर गौ के गर्भ से उत्पन्न हुए महाबली ऋषि ने राजा और उनके समस्त मन्त्रियों को प्रसन्न करते हुए कहा -॥21॥
 
Bhishma says - King! On hearing Nahush's words, the mighty sage born from the womb of a cow delighted the king and all his ministers and said -॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)