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mahabharat 13.53.1: भीष्म कहते हैं - भरतपुत्र! च्यवन ऋषि को ऐसी अवस्था में अपने नगर के निकट आये जानकर राजा नहुष अपने पुरोहितों और मन्त्रियों के साथ शीघ्रतापूर्वक वहाँ पहुँचे।   |   mahabharat अध्याय 13.53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.53.1 
भीष्म उवाच
नहुषस्तु तत: श्रुत्वा च्यवनं तं तथागतम्।
त्वरित: प्रययौ तत्र सहामात्यपुरोहित:॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - भरतपुत्र! च्यवन ऋषि को ऐसी अवस्था में अपने नगर के निकट आये जानकर राजा नहुष अपने पुरोहितों और मन्त्रियों के साथ शीघ्रतापूर्वक वहाँ पहुँचे।
 
Bhishma says - Son of Bharat! Knowing that the sage Chyavana had come near his city in such a condition, King Nahush along with his priests and ministers reached there quickly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)