श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 52: गौओंकी महिमाके प्रसंगमें च्यवन मुनिके उपाख्यानका आरम्भ, मुनिका मत्स्योंके साथ जालमें फँसकर जलसे बाहर आना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  13.52.25 
इत्युक्तो मत्स्यमध्यस्थश्च्यवनोवाक्यमब्रवीत्।
यो मेऽद्य परम: कामस्तं शृणुध्वं समाहिता:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
जब मल्लाहों ने ऐसा कहा, तब मछलियों के बीच बैठे हुए महर्षि च्यवन ने कहा - 'गेहलो! इस समय मेरी महानतम इच्छा को ध्यानपूर्वक सुनो ॥ 25॥
 
When the boatmen said this, the great sage Chyavana, sitting amongst the fishes, said, 'Bowlers! Listen attentively to my greatest desire at this time.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)