Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.50.47: मिश्रित पुरुष यदि शास्त्रीय बुद्धि प्राप्त भी कर ले, तो भी वह उसके शरीर को उसके स्वभाव से अलग नहीं कर सकती। उसका शरीर जिस भी स्वभाव का बना हो, चाहे वह अच्छा हो, मध्यम हो या बुरा हो, वही स्वभाव उसे सुखदायी लगता है ॥47॥ | mahabharat अध्याय 13.50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शरीरमिह सत्त्वेन न तस्य परिकृष्यते।
ज्येष्ठमध्यावरं सत्त्वं तुल्यसत्त्वं प्रमोदते॥ ४७॥
अनुवाद
मिश्रित पुरुष यदि शास्त्रीय बुद्धि प्राप्त भी कर ले, तो भी वह उसके शरीर को उसके स्वभाव से अलग नहीं कर सकती। उसका शरीर जिस भी स्वभाव का बना हो, चाहे वह अच्छा हो, मध्यम हो या बुरा हो, वही स्वभाव उसे सुखदायी लगता है ॥47॥
Even if a mixed person acquires classical intelligence, it cannot remove his body from its nature. Whatever kind of nature his body is made of, whether good, medium or bad, that nature seems pleasurable to him. 47॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥