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mahabharat 13.50.4: ब्राह्मण की बताई गई चार पुत्रियों में से केवल दो स्त्रियों - ब्राह्मणी और क्षत्रिय - के गर्भ से ब्राह्मण ही उत्पन्न होता है, तथा शेष दो वैश्य और शूद्र स्त्रियों के गर्भ से उत्पन्न पुत्र क्रमशः माता की जाति के ब्राह्मणत्व से हीन माने जाते हैं।4॥   |   mahabharat अध्याय 13.50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.50.4 
भार्याश्चतस्रो विप्रस्य द्वयोरात्मा प्रजायते।
आनुपूर्व्याद् द्वयोर्हीनौ मातृजात्यौ प्रसूयत:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण की बताई गई चार पुत्रियों में से केवल दो स्त्रियों - ब्राह्मणी और क्षत्रिय - के गर्भ से ब्राह्मण ही उत्पन्न होता है, तथा शेष दो वैश्य और शूद्र स्त्रियों के गर्भ से उत्पन्न पुत्र क्रमशः माता की जाति के ब्राह्मणत्व से हीन माने जाते हैं।4॥
 
Of the four daughters of a Brahmin mentioned, only a Brahmin is born from the womb of two women - Brahmin and Kshatriya, and the sons born from the womb of the remaining two Vaishya and Shudra women are considered to be inferior to Brahminism, respectively, of the mother's caste. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)