Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.50.39: युधिष्ठिर ने पूछा, "पितामह! जो व्यक्ति चारों वर्णों से बहिष्कृत है, वर्णसंकर कुल से उत्पन्न हुआ है, जो अनार्य है, किन्तु बाहर से आर्य जैसा दिखता है, उसे हम कैसे पहचान सकते हैं?" | mahabharat अध्याय 13.50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर उवाच
वर्णापेतमविज्ञाय नरं कलुषयोनिजम्।
आर्यरूपमिवानार्यं कथं विद्यामहे वयम्॥ ३९॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "पितामह! जो व्यक्ति चारों वर्णों से बहिष्कृत है, वर्णसंकर कुल से उत्पन्न हुआ है, जो अनार्य है, किन्तु बाहर से आर्य जैसा दिखता है, उसे हम कैसे पहचान सकते हैं?"
Yudhishthira asked, "Grandfather! How can we recognise a person who is outcast from all the four castes, born of a mixed caste man, who is non-Aryan but looks like an Arya from the outside?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥