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mahabharat 13.50.3: भीष्मजी बोले - बेटा ! पूर्वकाल में प्रजापति ने यज्ञ के लिए केवल चार वर्ण और उनके पृथक-पृथक कर्म ही बनाए थे ॥3॥   |   mahabharat अध्याय 13.50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.50.3 
भीष्म उवाच
चातुर्वर्ण्यस्य कर्माणि चातुर्वर्ण्यं च केवलम्।
असृजत् स हि यज्ञार्थे पूर्वमेव प्रजापति:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले - बेटा ! पूर्वकाल में प्रजापति ने यज्ञ के लिए केवल चार वर्ण और उनके पृथक-पृथक कर्म ही बनाए थे ॥3॥
 
Bhishmaji said – Son! In earlier times, Prajapati had created only four varnas and their separate deeds for the yagya. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)