Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.50.20: यदि योगव जाति का कोई पुरुष सैरंध्र जाति की स्त्री से संभोग करता है, तो उससे योगव जाति का पुत्र उत्पन्न होता है, जो जंगलों में जाल बिछाकर जानवरों को पकड़कर अपनी जीविका चलाता है। यदि वैदेह जाति का कोई पुरुष उसी जाति की स्त्री से संभोग करता है, तो उससे मर्यक जाति का पुत्र उत्पन्न होता है, जो मदिरा बनाता है। | mahabharat अध्याय 13.50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अतश्चायोगवं सूते वागुराबन्धजीवनम्।
मैरेयकं च वैदेह: सम्प्रसूतेऽथ माधुकम्॥ २०॥
अनुवाद
यदि योगव जाति का कोई पुरुष सैरंध्र जाति की स्त्री से संभोग करता है, तो उससे योगव जाति का पुत्र उत्पन्न होता है, जो जंगलों में जाल बिछाकर जानवरों को पकड़कर अपनी जीविका चलाता है। यदि वैदेह जाति का कोई पुरुष उसी जाति की स्त्री से संभोग करता है, तो उससे मर्यक जाति का पुत्र उत्पन्न होता है, जो मदिरा बनाता है।
If a man of the Yogava caste mates with a woman of the Sairandhra caste, he produces a son of the Yogava caste, who earns his living by trapping animals by laying nets in the forests. If a man of the Vaideha caste mates with a woman of the same caste, he produces a son of the Mareyak caste, who makes wine.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥