Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.50.18: इस प्रकार, बाहरी और बाहरी जातियों की स्त्रियों के साथ संभोग करने से विपरीत संकर जातियों की उत्पत्ति बढ़ती जाती है। धीरे-धीरे निम्न जातियों की संतानें पैदा होने लगती हैं। इन संकर जातियों की संख्या सामान्यतः पंद्रह होती है। | mahabharat अध्याय 13.50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस प्रकार, बाहरी और बाहरी जातियों की स्त्रियों के साथ संभोग करने से विपरीत संकर जातियों की उत्पत्ति बढ़ती जाती है। धीरे-धीरे निम्न जातियों की संतानें पैदा होने लगती हैं। इन संकर जातियों की संख्या सामान्यतः पंद्रह होती है।
In this way, by mating with women of outer and outer castes, the creation of reverse hybrids keeps on increasing. Gradually, children of inferior castes start being born. The number of these hybrid castes is generally fifteen.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥