Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.50.10: यदि कोई क्षत्रिय ब्राह्मण स्त्री के साथ संभोग करता है, तो उसके गर्भ से सूत जाति का पुत्र उत्पन्न होता है, जो वर्ण से बहिष्कृत होता है और सारथी का कार्य करता है। इसी प्रकार, यदि कोई वैश्य ब्राह्मण स्त्री के साथ संभोग करता है, तो उसके गर्भ से वैदेहिक जाति का पुत्र उत्पन्न होता है, जो कर्मकांडों में भ्रष्ट होता है, जिसका उपयोग अंतःपुर आदि की रक्षा के लिए किया जाता है, इसलिए उसे मौद्गल्य भी कहा जाता है। | mahabharat अध्याय 13.50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि कोई क्षत्रिय ब्राह्मण स्त्री के साथ संभोग करता है, तो उसके गर्भ से सूत जाति का पुत्र उत्पन्न होता है, जो वर्ण से बहिष्कृत होता है और सारथी का कार्य करता है। इसी प्रकार, यदि कोई वैश्य ब्राह्मण स्त्री के साथ संभोग करता है, तो उसके गर्भ से वैदेहिक जाति का पुत्र उत्पन्न होता है, जो कर्मकांडों में भ्रष्ट होता है, जिसका उपयोग अंतःपुर आदि की रक्षा के लिए किया जाता है, इसलिए उसे मौद्गल्य भी कहा जाता है।
If a Kshatriya has intercourse with a Brahmin woman, he produces a son of the Sut caste from her womb, who is outcast from the Varna and performs the work of a charioteer. Similarly, if a Vaishya has intercourse with a Brahmin woman, he produces a son of the Vaidehak caste, who is corrupt in his rituals, who is used for the protection of the inner palace, etc., and is therefore also called Maudgalya.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥