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mahabharat 13.5.29: तोते की इस दृढ़ भक्ति और शील को जानकर इन्द्र और भी प्रसन्न हुए और उन्होंने तुरन्त उस वृक्ष को अमृत से सींच दिया ॥29॥   |   mahabharat अध्याय 13.5: स्वामिभक्त एवं दयालु पुरुषकी श्रेष्ठता बतानेके लिये इन्द्र और तोतेके संवादका उल्लेख   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.5.29 
विदित्वा च दृढां भक्तिं तां शुके शीलसम्पदम्।
प्रीत: क्षिप्रमथो वृक्षममृतेनावसिक्तवान्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
तोते की इस दृढ़ भक्ति और शील को जानकर इन्द्र और भी प्रसन्न हुए और उन्होंने तुरन्त उस वृक्ष को अमृत से सींच दिया ॥29॥
 
Indra became even more happy after knowing about this strong devotion and modesty of the parrot. He immediately watered that tree with nectar. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)